२१ मई २०११ को इग्नू के २३वे दीक्षांत समारोह में जो की लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज में संपन्न हुआ बांये से तीसरे नीली कमीज लाल टाई में मुकेश 'नादान' मुख्य अतिथि को सुनते हुए
शनिवार, मई 21, 2011
सच हुए सपने मेरे....................
२१ मई २०११ को इग्नू के २३वे दीक्षांत समारोह में जो की लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज में संपन्न हुआ बांये से तीसरे नीली कमीज लाल टाई में मुकेश 'नादान' मुख्य अतिथि को सुनते हुए
मंगलवार, मई 17, 2011
मौकापरस्त
पहले तू कहता है मगर फिर आप कहता है
चुनावी दौर है नेता गधे को बाप कहता है
अबकी एक बार दे दो एक मौका
पिछली गलती करदो माफ़ कहता है...........
नादान
चुनावी दौर है नेता गधे को बाप कहता है
अबकी एक बार दे दो एक मौका
पिछली गलती करदो माफ़ कहता है...........
नादान
करूणानिधि की पुकार
नमक डाल दिया क्यूँ मेरे घाव में
छेद कर दिया डूबती नाव में
अब क्या होगा मेरे परिवार का
सत्ता भी गयी अबकी चुनाव में ....................
नादान
छेद कर दिया डूबती नाव में
अब क्या होगा मेरे परिवार का
सत्ता भी गयी अबकी चुनाव में ....................
नादान
ऊँचा सोचो .........................
सैकड़ो चुरा कर बईमान हो जाओगे
करोडो चुराओ तो महान हो जाओगे
एक बार लड़कर चुनाव देखिये
बन गए मंत्री तो भगवन हो जाओगे .............
नादान
करोडो चुराओ तो महान हो जाओगे
एक बार लड़कर चुनाव देखिये
बन गए मंत्री तो भगवन हो जाओगे .............
नादान
दिल खोल के लूटो OFFER
न गरीबी हटाने के लिए
न आतंकवाद मिटाने के लिए
वो आये चुनाव मैदान में
सरकारी खजाने के लिए.............
नादान
न आतंकवाद मिटाने के लिए
वो आये चुनाव मैदान में
सरकारी खजाने के लिए.............
नादान
खामोश................
कीमत पेट्रोल की बढ़ रही
कितनी रफ़्तार से
कराह रही है जनता
महंगाई की मार से
वोह तो विदेशी है
शिकायत नहीं उनसे
खामोश इस कदर रहेंगे
यह उम्मीद न थी सरदार से
NADAN
कितनी रफ़्तार से
कराह रही है जनता
महंगाई की मार से
वोह तो विदेशी है
शिकायत नहीं उनसे
खामोश इस कदर रहेंगे
यह उम्मीद न थी सरदार से
NADAN
सोमवार, मई 16, 2011
खज़ाना सरकारी दौलत हमारी
२ साल पहले इंडियन आयल कंपनी ने अपना ५० वां जन्मदिन मनाया अपने हर कर्मचारी को सोने का सिक्का बांटा भाई आप सरकारी कंपनी है आपको चलाने हम जैसे लोग टैक्स देते है एक तरफ आप पेट्रोल के दाम बढ़ाये जा रहे है और कहते है कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है दाम बढ़ाना मजबूरी है तो फिर सोने के सिक्के बांटने की क्या जरूरत है आपसे निवेदन है की सरकारी खजाने से वाह वाही न लूटे क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है.
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ढॅूढतेे हो छायीं पेड़ को उखाड़कर, बने हैं कई मकान रिश्ते बिगाड़कर, तालीम भी तुमसे बदनाम हो गयी, पायी है डिग्री जो तुमने जुगाड़कर, ...
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मरने के बाद भी हमको खूब सताया गया, मारा रिश्तों ने इल्जाम बीमारी पर लगाया गया। @Nadan 31 Aug 2022