बुधवार, अप्रैल 22, 2020
मुख्यमंत्री योगी का पिता की मृत्यु होने पर भी प्रदेश को न छोड़ना एंव अंतिम दर्शन को न जाना एक ऐसी नजीर जिसने रिश्ते को नही सूबे की आवाम को तरजीह दी...................पढ़िए मुकेश नादान की कलम से
पिता से भी बढ़कर, आपके आवाम से रिश्ते
निकले
हम तो इंसान समझे योगीजी आप तो फरिश्ते
निकले ।...नादान
जी हाँ, ऊपर लिखी मेरी दो पंक्तियाँ बिल्कुल वाजिब हैं सूबे
के सबसे बड़े राजनीतिक ओहदे पर बैठे सन्त की शान में जिसने 23 करोड़ प्रदेश की आवाम को कोरोना महामारी से निजात दिलाने के
लिए फैसला किया कि वो मरहूम हुए पिता के आखिरी दीदार और जनाजे में शामिल नही होंगे।
20 अप्रैल 2020 को दोपहर को सारे टी0वी0 चैनलों पर एक ही
खबर बार बार दिखायी जा रही थी और वो खबर थी दिल्ली के एम्स में भर्ती आनन्द सिंह बिष्ट
जी के निधन की, 90 साल के बिष्ट जी
पिछले कुछ समय से बीमार थे और उनका इलाज नई दिल्ली के एम्स में चल रहा था ।
कभी कभी व्यक्ति का परिचय
व्यक्ति के व्यक्तित्व से बहुत बड़ा हो जाता
है, यह सौभाग्य दिवंगत बिष्ट जी
को मिला था अपने पुत्र के सुकर्मों से, जी हाँ देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता
थे आनन्द सिंह बिष्ट जिनके देहान्त की खबर से पूरा देश शोकाकुल हो गया था।
पिता के देहान्त की सूचना
सुनकर कोई भी विचलित हुए बिना नही रह सकता जो जहां भी होगा जिस भी स्थिति में होगा
जल्दी से जल्दी पिता के अंतिम दर्शन करने को रवाना हो जाएगा । लेकिन सर्वसुलभ सुविधा
युक्त कोई पुत्र अपने संवैधानिक जिम्मेदारियों के मद्देनजर यह फैसला ले ले कि वो पिता के अंतिम दर्शन को नही
जाएगा तो वाकई वो बहुत ही बड़े जिगर वाला कर्मयोगी होगा।
शायद इस मामले में पहली बार
जिम्मेदारी ने रिश्तेदारी को पीछे कर दिया, इसको सही साबित कर दिया है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
ने विश्वभर में फैले कोरोना महामारी के इस काल में अधिकारियों के साथ पल पल की जानकारी
लेकर प्रदेश को इस महामारी से मुक्त कराना उनकी पहली प्राथमिकता है वरना भारतीय राजनीति
में आज तक ऐसा उदाहरण नही मिला कि कोई उच्च सरकारी सुविधा सम्पन्न पुत्र अपने संवैधानिक
दायित्वों के लिए अपने पिता के अंतिम दर्शन का त्याग कर दे।
20 अप्रैल को मुख्यमंत्री
आवास पर अधिकारियों की मीटिंग ले रहे योगी को सूचना मिलती है कि पिताजी का देहान्त
हो गया है, एक मिनट से कम समय में भी
परिवारजनों से बात करके भारी दिल, नम आँखों एंव भरे
गले के साथ फिर प्रदेश की जनता के कल्याण और
कोरोना को हराने की रणनीति की रूपरेखा बनाने में व्यस्त हो गए। मौजूद अधिकारियों ने
सिर्फ योगी की भावभंगिमा से ही किसी अनहोनी को भाप लिया था।
मीटिंग समाप्त करके योगी ने
अपनी माताजी को सम्बोधित एक पत्र जारी किया जिसमें लिखा कि पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे बहुत गहरा दुख
और शोक है, अंतिम क्षणों में उनके दर्शन
की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु प्रदेश के
23 करोड़ जनता के हित के मद्देनजर
और अपने कर्तव्यबोध के कारण मै उनके दर्शन न कर सका। कोरोना महामारी को परास्त करने
की रणनीति के कारण 21 अप्रैल को उनके अंतिम
संस्कार में भाग नही ले पा रहा हॅू। पूजनीया मां आप सभी से अपील है कि लाॅक डाउन का
पालन करते हुए कम से कम लोग अंतिम संस्कार में भाग लें। लाॅकडाउन के बाद दर्शनार्थ
आऊॅगा।
आखिर में, लाॅकडाउन के मद्देनजर दूरदर्शन के द्वारा पुनः प्रसारित
की जा रही महर्षि वाल्मीकि रामायण के एक वाकिए का जिक्र किया
जाना प्रासंगिक होगा, वो यह कि प्रभु श्रीराम
भी अपने पिता के अंतिम संस्कार में शिरकत नही कर पाए थे, क्योंकि वो उस समय अपने वंश की परम्परा को बचाने और पिता की
हुक्म की तामील में दूरस्थ प्रदेश में चैiदह वर्ष के वनवास
में थे और आज योगीजी प्रदेश को बचाने और अपने पद की गरिमा को श्रेष्ठता प्रदान करने
के लिए अपने पिताजी के प्र्रदेश से दूर हैं। परिस्थितियाॅ योगी जी और प्रभु श्रीराम
जी की अलग अलग हैं लेकिन दोनो की सेवा और त्याग एक जैसे ही प्रतीत हो रहे है। रामायण
के इसी प्रसंग के मद्देनजर योगी जी को समर्पित
दो पंक्तियाँ:
वो भी शामिल न हो सके थे, पिता के अंतिम संस्कार में,
योगीजी आप दिख रहे हैं मुझे प्रभु श्रीराम से किरदार
में।
खबरों से यह पता चला है कि
पिता आनन्द सिंह बिष्ट अपने संन्यासी पुत्र मुख्यमंत्री योगी को महाराज कहकर सम्बोधित
करते थे, शायद उन्हें पहले ही यह एहसास
रहा होगा कि ये महाराज देश के सबसे बडे़ राज्य का महाराज बनकर अपनी सेवा और त्याग से
उनका नाम रोशन करेगा। कोटि कोटि नमन मरहूम बिष्ट साहेब को।
शुक्रवार, अप्रैल 17, 2020
लालफीताशाही के फेर
सेवा में,
माननीय मंत्री जी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली
महोदय,
सादर प्रणाम, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी
बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर, लखनऊ की एक गरीब बच्ची साक्षी पुत्री श्री प्रेम लाल का कक्षा प्रथम में प्रवेश
हेतु फार्म केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ में
भरवाया था । गरीब, अनुसूचित जाति
एंव बेटी होने के बावजूद साक्षी का प्रवेश राईट टू एजूकेशन की कैटेगरी मे नही हो
सका।
इसके बाद मैंने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक
सहयोग न मिलने के कारण इस बच्ची की फीस माफी हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी तक
निवेदन पहुंचाने के लिए पीजी पोर्टल पर
निवेदन किया जिसका सन्दर्भ नम्बर Grievance
Status for registration number : PMOPG/E/2016/0175016 Date of Receipt
25/05/2016 Received By Ministry/Department Prime Ministers Office था।
महोदय, बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि
केन्द्रीय विद्यालय के जिम्मेदारों ने माननीय प्रधानमंत्री जी से किए गए इस विशेष
निवेदन को लालफीताशाही के फेर में डालकर नकारात्मक रूप से प्रधानाचार्य ने इस जवाब के साथ कि आरटीई के
तहत प्रवेश के लिए जो लाटरी डाली गयी थी उसमें आपके पाल्य का नाम नही निकला अतः
आरटीई के तहत प्रवेश नही हुआ । अतः फीस माफी की सुविधा नही दी जा सकती है, समाप्त कर दिया। प्रधानाचार्य का जवाब इस मेल
के साथ संलग्न है।
महोदय, केन्द्रीय विद्यालयों द्वारा प्रवेश के लिए
आए सभी फाॅर्म आरटीई की लाटरी में शामिल
कर रहे हैं, उनकी इस व्यवस्था से
सक्षम और नौकरी पेशा के बच्चों का नाम आरटीई की लाटरी में आ जाता है और साक्षी
जैसी हजारों बच्चियों जो आरटीई की वास्तविक हकदार हैं, यह सुविधा माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन के बाद भी नही
पा पाती हैं। लाटरी की यह प्रक्रिया आरटीई सुविधा के साथ अन्याय और गरीब बच्चों को हतोत्साहित करने वाली है।
अतः इस प्रार्थना पत्र के
माध्यम से आपसे विनम्र निवेदन है कि सक्षम अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन को निर्देशित करने की कृपा करें
कि 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया
से प्रवेश के लिए आवेदित फाॅर्म में से
साक्षी जैसे वास्तविक गरीब बच्चों के फार्म उनके अभिभावकों की आय और स्तर देखकर
अलग छाॅटकर उनको ही आरटीई की लाटरी में शामिल किया जाए ताकि आरटीई में पात्र
बच्चों का ही प्रवेश हो पाए न कि उनका जोकि फीस देने में सक्षम है।
ऐसा उपाय किए जाने से ही
आरटीई सुविधा का सदुपयोग हो पाएगा वरना पात्र बच्चे इस सुविधा से वंचित होते
रहेंगे।
कृत्य कार्यवाही से मुझे
भी अवगत कराने की कृपा की जाए।
सादर सहित।
निवेदक
मुकेश कुमार
मकान नम्बर 594डी/300 ए,
शिखर भवन,
निलमथा, दुर्गापुरी कालोनी,
लखनऊ 226602
लघुकथा.......नजरिया बदलो
अचानक शुरू हुई तेज बरसात से बचने के लिएा तमाम राहगीर एक बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए, पेड़ बहुत विशाल और पुराना था उसकी जड़ में एक चबूतरा भी बना था जिस पर लोगों ने कई भगवानो की मूर्तियाॅ भी रख दी थी। बरसात रूकते ही सब लोग पुनः अपनी राह पर चलने के लिए पेड़ के साए से निकलने लगे। बरसात में रूके एक बुजुर्ग अपने साथ खड़े एक छोटे बच्चे का हाथ पकड़ते हुए चबूतरे पर रखे भगवानों के हाथ जोड़ते हुए निकलने लगे। बुजुर्ग के हाथ जोड़ने के कार्य को देख बच्चे को उत्सुकता हुई और उसने प्रश्न किया दादाजी आपने उन मूर्तियों को हाथ क्यों जोड़ा । ‘ बेटा जो मुसीबत में आपका साथ दे हाथ जोड़कर उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए, ऐसा हमारे धर्म में कहा गया है।’ बुजुर्ग ने बच्चे को जवाब दिया। बच्चे ने फिर सवाल किया ‘पर अपने धर्म में तो मूर्ति पूजा करना मना है, फिर आपने मूर्तियों के हाथ क्यों जोड़े।’
‘बेटा हमारे धर्म में मूर्ति पूजा करना मना है लेकिन किसी दूसरे धर्म के भगवान का सम्मान करना थोड़ी मना है और अगर तुम्हें लग रहा है कि मैंने मूर्तियों को हाथ जोड़ा तो तुम अपना नजरिया बदल लो।’ बुजुर्ग ने कहा।
बच्चे ने पूछा ‘वो कैसे‘ ?
बजुर्ग ने कहा ‘जब तेज बारिश हो रही थी तो हम बचने के लिए कहाॅ रूके थे’ ? बच्चे ने कहा पीपल के नीचे ।
बजुर्ग ‘ तो बेटा क्या हमें पीपल का शुक्रिया अदा नही करना चाहिए ? करना चाहिए बच्चे ने कहा। तो बेटा समझ लो मैं पीपल के पेड़ को हाथ जोड़कर शुक्रिया किया।
बच्चे ने कहा ‘अच्छा दादाजी मैं समझ गया, हमें सबका सम्मान करना है अगर कहीं धार्मिक पक्ष आड़े आ रहा है तो हमें अपना नजरिया बदल लेना चाहिए।‘
बजुर्ग ने कहा ‘ हाॅ सलीम बेटा। दोनो आपस में बात करते हुए अपनी राह पर चल दिए।
‘बेटा हमारे धर्म में मूर्ति पूजा करना मना है लेकिन किसी दूसरे धर्म के भगवान का सम्मान करना थोड़ी मना है और अगर तुम्हें लग रहा है कि मैंने मूर्तियों को हाथ जोड़ा तो तुम अपना नजरिया बदल लो।’ बुजुर्ग ने कहा।
बच्चे ने पूछा ‘वो कैसे‘ ?
बजुर्ग ने कहा ‘जब तेज बारिश हो रही थी तो हम बचने के लिए कहाॅ रूके थे’ ? बच्चे ने कहा पीपल के नीचे ।
बजुर्ग ‘ तो बेटा क्या हमें पीपल का शुक्रिया अदा नही करना चाहिए ? करना चाहिए बच्चे ने कहा। तो बेटा समझ लो मैं पीपल के पेड़ को हाथ जोड़कर शुक्रिया किया।
बच्चे ने कहा ‘अच्छा दादाजी मैं समझ गया, हमें सबका सम्मान करना है अगर कहीं धार्मिक पक्ष आड़े आ रहा है तो हमें अपना नजरिया बदल लेना चाहिए।‘
बजुर्ग ने कहा ‘ हाॅ सलीम बेटा। दोनो आपस में बात करते हुए अपनी राह पर चल दिए।
गुरुवार, अप्रैल 16, 2020
Request to the HRD Minister Ji
सेवा में,
माननीय मंत्री जी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली
महोदय,
सादर प्रणाम, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर, लखनऊ की एक गरीब बच्ची साक्षी पुत्री श्री प्रेम लाल का कक्षा प्रथम में प्रवेश हेतु फार्म केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ में भरवाया था । गरीब, अनुसूचित जाति एंव बेटी होने के बावजूद साक्षी का प्रवेश राईट टू एजूकेशन की कैटेगरी मे नही हो सका।
इसके बाद मैंने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक सहयोग न मिलने के कारण इस बच्ची की फीस माफी हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी तक निवेदन पहुॅचाने के लिए पीजी पोर्टल पर निवेदन किया जिसका सन्दर्भ नम्बर था।
महोदय, बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केन्द्रीय विद्यालय के जिम्मेदारों ने माननीय प्रधानमंत्री जी से किए गए इस विशेष निवेदन को लालफीताशाही के फेर में डालकर नकारात्मक रूप से प्रधानाचार्य ने इस जवाब के साथ कि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए जो लाटरी डाली गयी थी उसमें आपके पाल्य का नाम नही निकला अतः आरटीई के तहत प्रवेश नही हुआ । अतः फीस माफी की सुविधा नही दी जा सकती है, समाप्त कर दिया। प्रधानाचार्य का जवाब इस मेल के साथ संलग्न है।
महोदय, केन्द्रीय विद्यालयों द्वारा प्रवेश के लिए आए सभी फाॅर्म आरटीई की लाटरी में शामिल कर रहे हैं, उनकी इस व्यवस्था से सक्षम और नौकरी पेशा के बच्चों का नाम आरटीई की लाटरी में आ जाता है और साक्षी जैसी हजारों बच्चियों जो आरटीई की वास्तविक हकदार हैं, यह सुविधा माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन के बाद भी नही पा पाती हैं। लाटरी की यह प्रक्रिया आरटीई सुविधा के साथ अन्याय और गरीब बच्चों को हतोत्साहित करने वाली है।
अतः इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से आपसे विनम्र निवेदन है कि सक्षम अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन को निर्देशित करने की कृपा करें कि 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेश के लिए आवेदित फाॅर्म में से साक्षी जैसे वास्तविक गरीब बच्चों के फाॅर्म उनके अभिभावकों की आय और स्तर देखकर अलग छाॅटकर उनको ही आरटीई की लाटरी में शामिल किया जाए ताकि आरटीई में पात्र बच्चों का ही प्रवेश हो पाए न कि उनका जोकि फीस देने में सक्षम है।
ऐसा उपाय किए जाने से ही आरटीई सुविधा का सदुपयोग हो पाएगा वरना पात्र बच्चे इस सुविधा से वंचित होते रहेंगे।
कृत्य कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराने की कृपा की जाए।
सादर सहित।
निवेदक
मुकेश कुमार
मकान नम्बर 594डी/300 ए,
शिखर भवन,
निलमथा, दुर्गापुरी कालोनी,
लखनऊ 226602
माननीय मंत्री जी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली
महोदय,
सादर प्रणाम, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर, लखनऊ की एक गरीब बच्ची साक्षी पुत्री श्री प्रेम लाल का कक्षा प्रथम में प्रवेश हेतु फार्म केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ में भरवाया था । गरीब, अनुसूचित जाति एंव बेटी होने के बावजूद साक्षी का प्रवेश राईट टू एजूकेशन की कैटेगरी मे नही हो सका।
इसके बाद मैंने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक सहयोग न मिलने के कारण इस बच्ची की फीस माफी हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी तक निवेदन पहुॅचाने के लिए पीजी पोर्टल पर निवेदन किया जिसका सन्दर्भ नम्बर था।
महोदय, बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केन्द्रीय विद्यालय के जिम्मेदारों ने माननीय प्रधानमंत्री जी से किए गए इस विशेष निवेदन को लालफीताशाही के फेर में डालकर नकारात्मक रूप से प्रधानाचार्य ने इस जवाब के साथ कि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए जो लाटरी डाली गयी थी उसमें आपके पाल्य का नाम नही निकला अतः आरटीई के तहत प्रवेश नही हुआ । अतः फीस माफी की सुविधा नही दी जा सकती है, समाप्त कर दिया। प्रधानाचार्य का जवाब इस मेल के साथ संलग्न है।
महोदय, केन्द्रीय विद्यालयों द्वारा प्रवेश के लिए आए सभी फाॅर्म आरटीई की लाटरी में शामिल कर रहे हैं, उनकी इस व्यवस्था से सक्षम और नौकरी पेशा के बच्चों का नाम आरटीई की लाटरी में आ जाता है और साक्षी जैसी हजारों बच्चियों जो आरटीई की वास्तविक हकदार हैं, यह सुविधा माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन के बाद भी नही पा पाती हैं। लाटरी की यह प्रक्रिया आरटीई सुविधा के साथ अन्याय और गरीब बच्चों को हतोत्साहित करने वाली है।
अतः इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से आपसे विनम्र निवेदन है कि सक्षम अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन को निर्देशित करने की कृपा करें कि 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया से प्रवेश के लिए आवेदित फाॅर्म में से साक्षी जैसे वास्तविक गरीब बच्चों के फाॅर्म उनके अभिभावकों की आय और स्तर देखकर अलग छाॅटकर उनको ही आरटीई की लाटरी में शामिल किया जाए ताकि आरटीई में पात्र बच्चों का ही प्रवेश हो पाए न कि उनका जोकि फीस देने में सक्षम है।
ऐसा उपाय किए जाने से ही आरटीई सुविधा का सदुपयोग हो पाएगा वरना पात्र बच्चे इस सुविधा से वंचित होते रहेंगे।
कृत्य कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराने की कृपा की जाए।
सादर सहित।
निवेदक
मुकेश कुमार
मकान नम्बर 594डी/300 ए,
शिखर भवन,
निलमथा, दुर्गापुरी कालोनी,
लखनऊ 226602
शनिवार, अप्रैल 11, 2020
रोता रहेगा दिल मेरा चैन से सो भी न पाऊॅगा, मेरे दायरे मे कोई भूखा हो तो मैं कैसे खाऊॅगा।......नादान
कलमकार की कलम बड़ी चंचल होती है, जो उसका क्षेत्र नही होता वहाॅ भी पहुॅच जाती है, कुछ कर भले ही न पाए लेकिन लिखने से बाज नही आती, कुछ दिन पहले मेरे अन्दर एक मानसिक द्वंद्व चल पड़ा कि कोरोना के इस दौर में उन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों एंव समाज सेवकों की क्या जिम्मेदारी होनी चाहिए जिनके क्षेत्र के लोग बेरोजगार हो गए हों और परिवार के सामने भूखों रहने की नौबत आ जाए।
बस साहब, उठायी कलम और शेरों वाली दो लाईन लिख डाली, आज अखबार में देखा इन लाईनों को हेडलाईन्स बनते और साथ ही तस्वीर भी छपी उन महानुभावों की जो वास्तव में मानवकल्याण में आगे हैं। धन्यवाद, सम्पादक महोदय और आपकी टीम को आपके अखबार को।
बस साहब, उठायी कलम और शेरों वाली दो लाईन लिख डाली, आज अखबार में देखा इन लाईनों को हेडलाईन्स बनते और साथ ही तस्वीर भी छपी उन महानुभावों की जो वास्तव में मानवकल्याण में आगे हैं। धन्यवाद, सम्पादक महोदय और आपकी टीम को आपके अखबार को।
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ढॅूढतेे हो छायीं पेड़ को उखाड़कर, बने हैं कई मकान रिश्ते बिगाड़कर, तालीम भी तुमसे बदनाम हो गयी, पायी है डिग्री जो तुमने जुगाड़कर, ...
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मरने के बाद भी हमको खूब सताया गया, मारा रिश्तों ने इल्जाम बीमारी पर लगाया गया। @Nadan 31 Aug 2022






