सोमवार, अगस्त 22, 2022
खाने से ज्यादा आदमी दवाई खा रहा है....................
शुक्रवार, जनवरी 21, 2022
हम नशे में थे......
तुम ज्यादा थे या कम नशे में थे,
हम कैसे बताएं खुद हम नशे में थे,
जश्न जन्मदिन का पीकर मनाने वाले,
मौत का मना रहे मातम नशे में थे,
तेरी सितमगरी का कभी बुरा नही माना,
हम पर किए गए तेरे सितम नशे में थे
मुफ्त पीने वाले इफरात पीकर गिर पडे़,
जेब से पीने वाले मिले कम नशे में थे,
ज्यादा पीने वालों को छोड़ दिया पुलिस ने,
जेल भेजे गए वो जो कम नशे में थे,
खुशी के मौके पर पी लेता हूॅ थोड़ी सी
ये कहने वाले नादान मिले हरदम नशे में थे ।
@ Nadan
गुरुवार, जनवरी 20, 2022
गुरुवार, सितंबर 23, 2021
आज दिनाक २३ सितम्बर २०२१ को एक आशु कविता प्रतियोगिता में मुझे आईना शीर्षक पर कविता लिखने को मिला था मैंने चार मुक्तक लिखे जो आपके लिए हाज़िर हैं
आईना
आँखे भर आयीं ,
उसका एहसास देखकर
आइना चिटक गया ,
मुझे उदास देखकर
तू कुछ भी हो जा, तेरे अर्दब में न आऊंगा ,
आइना हूँ मैं, तुम जैसे हो, वैसा ही दिखाऊंगा
मैं कितना भी छिपाऊं,
मेरी परेशानियां समझ जाती है
मेरी माँ, मुझे मेरी जिंदगी
का आईना नज़र आती है
क्यों खड़े हो आईने के सामने
श्रृंगार करके ,
हमारी तरह तारीफ नहीं करेगा तुम्हें
बाँहो में भरके
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ढॅूढतेे हो छायीं पेड़ को उखाड़कर, बने हैं कई मकान रिश्ते बिगाड़कर, तालीम भी तुमसे बदनाम हो गयी, पायी है डिग्री जो तुमने जुगाड़कर, ...
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मरने के बाद भी हमको खूब सताया गया, मारा रिश्तों ने इल्जाम बीमारी पर लगाया गया। @Nadan 31 Aug 2022