बुधवार, मार्च 17, 2010

खामोश .काम करने दीजिये




जब से चश्मा लगाने लगे हैं
व्यस्त ज्यादा ही आने लगे हैं
नैना अब महफूज हो गए हैं
साइकिल भी तेज चलाने लगे हैं
सुनकर पहले मुस्कराए जनाब
बाद में हम पर गुस्साने लगे हैं
कहते हैं लिखकर दे दूंगा यह
सब ही हमको सताने लगे हैं
काम बड़े कर रहे बचपन से
"नादान" अब खुद को बताने लगे हैं


दिनाक १७.०३.२०१०
जनाब जहीर जी पुराने साथी के साथ यादव जी, रस्तोगी जी, वैदयानाथान जी, प्रवीण जी , उदय राज जी, कौशल जी और उमेश प्रसाद जी इस चित्र को संजोया मुकेश "नादान" ने

गुरुवार, मार्च 11, 2010

जज्बात


गुनाह कुछ ऐसा किया है मैंने
दोस्त नाम दुश्मन को दिया है मैंने


खुद और खुदा की पहचान सिर्फ
जिंदगी को अकेले ही जिया है मैंने .........दोस्त

मेरे ग़मों से तू हैरान न हो
खुशियों को खुद छोड़ दिया है मैंने ........दोस्त

तेरी दवा भी बेअसर हो गयी
जहर कुछ ज्यादा ही पिया है मैंने ........दोस्त

मिल गयी लाखो खुशियाँ मुझे
नाम खुदा का एक बार लिया है मैंने .........दोस्त

वो भूलकर खुश रहने लगे
याद उनको भी नहीं किया है मैंने ............दोस्त

मिल न जाये सजा गलतियों की
खुद को नादान लिख लिया है मैंने .........दोस्त

देश को आगे ले जाने के लिए देश के हर व्यक्ति को चाहे वोह भी किसी रुतबे पर क्यों न हो इन शब्दों का पालन करना चाहिए.........आप से नादान की यही गुज़ारिश है ......जय हिंद.....जय भारत




मुकेश और शीतल ६ फ़रवरी २०१० को शाहजहाँ को याद करने पहुंचे मौका था शाहजहाँ के पहले निकाह के ४०० साल पूरा होना का १६१० में सफवी वंश की राजकुमारी जोकि मिर्ज़ा मुज़फ्फर हुसैन सफवी की पुत्री थी के साथ शाहजहाँ का पहला निकाह हुआ था ।

लाइक अहमद पेज संख्या १३४


कुछ जुदा जुदा मेरे हुज़ूर नज़र आते है
क्या बात है चश्मे बद्दूर नज़र आते है

शुक्रवार, मार्च 05, 2010

महिला दिवस


जैसाकि ज्ञात है की हर वर्ष ८ मार्च को हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर कागजो में महिलाओं के विषय में बड़े बड़े वादे कर के तीनो लोको का जो सुख प्राप्त करते है वो शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है फिर भी मेरे कवि मन ने कुछ शब्दों के माध्यम से अपनी आवाज़ को बहार निकलने की कोशिश की है आसा है की मेरी गलतियों को इंगित कर मुझको कुछ सीखने का मौका देंगे
धन्यवाद्



महिला दिवस

शान माँ बहन की
और बढ़ाना चाहिए
बहु और बेटी में
फर्क मिटाना चाहिए

साल में एक दिन
मुझे कम लगता है
महिला दिवस हर घर में
रोज मानना चाहिए ..........................

झुक कर करे सलाम
जमाना उसको
बेटी को काबिल इतना बनाना चाहिए ..................महिला ...................

जन्म से पहले ही
उसे मौत दे देना
तुम्हारी इस आदत में बदलाव आना चाहिए ............महिला....................

बहु भी नज़र आये
बेटी अपनी
हर सास को
चस्मा ऐसा लगाना चाहिए ................महिला.......................

मुकेश " नादान "