मंगलवार, जुलाई 13, 2010


रोता हूँ रोज सवेरे जब अख़बार देखता हूँ
पहले ही पन्ने पर हत्या बलात्कार देखता हूँ ............

फिर कातिल को सजा न दे पाई अदालत
गवाहों को मुकरते बार बार देखता हूँ ...................

ढूंढता रहा सारे दिन ख़बरों को
पर ख़बरों से ज्यादा प्रचार देखता हूँ ..............

दोष तुम्हारा नहीं खबरनवीशों
मैं भी अख़बार के साथ उपहार देखता हूँ ........

खाली पड़े है मंदिर मस्जिद के रास्ते
मैखानो में लम्बी कतार देखता हूँ ..................

बेमानी से लगते है खून के रिश्ते
जब एक घर चूल्हे चार देखता हूँ................

मंगलवार, जून 22, 2010

तो कोई बात hai


रोते को हँसाओ तो कोई बात है
भेदभाव मिटाओ तो कोई बात है
अपनों को तो अपना बना लेते है सब
गैरों को अपना बनाओ तो कोई बात है


यह चश्मे वाले साहेब हैं जनाब मानस जी उनके ठीक बांये है शिखर मुकेश और उनके बांये है शालिनी मुकेश तीनो ही अपनी शरारतों के लिए घर को अखाडा बना सकने की ताक़त रखते है इसलिए मई इन्हें कहता हूँ ........न्यू थ्री इदिओत्स.............कहो कैसी रही

बेवजह

मोदी बनाम नितीश

जनता के पांच करोड़ की रकम पर दोनों ही ताल ठोक रहे है जो की लोकतंत्र के लिए नुक्सान दायक है और किसी भी तरह से गरीब जनता के हित में नहीं है सभ्य नेताओ से अनुरोध है की जनता की टैक्स की कमी को अपनी न समझे और आप खुद भी जनता के सेवक है न की मालिक इस लिए इस मुद्दे को ख़त्म कर दे बेहतर होगा.