शुक्रवार, अप्रैल 17, 2020

लालफीताशाही के फेर



सेवा में,
माननीय मंत्री जी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली

महोदय,
सादर प्रणाम, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर, लखनऊ की एक गरीब बच्ची साक्षी पुत्री श्री प्रेम लाल का कक्षा प्रथम में प्रवेश हेतु  फार्म केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ में भरवाया था । गरीब, अनुसूचित जाति एंव बेटी होने के बावजूद साक्षी का प्रवेश राईट टू एजूकेशन की कैटेगरी मे नही हो सका।
इसके बाद मैंने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक सहयोग न मिलने के कारण इस बच्ची की फीस माफी हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी तक निवेदन पहुंचाने के लिए  पीजी पोर्टल पर निवेदन किया जिसका सन्दर्भ नम्बर Grievance Status for registration number : PMOPG/E/2016/0175016 Date of Receipt 25/05/2016 Received By Ministry/Department Prime Ministers Office था।
महोदय, बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केन्द्रीय विद्यालय के जिम्मेदारों ने माननीय प्रधानमंत्री जी से किए गए इस विशेष निवेदन को लालफीताशाही के फेर में डालकर नकारात्मक रूप से  प्रधानाचार्य ने इस जवाब के साथ कि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए जो लाटरी डाली गयी थी उसमें आपके पाल्य का नाम नही निकला अतः आरटीई के तहत प्रवेश नही हुआ । अतः फीस माफी की सुविधा नही दी जा सकती है, समाप्त कर दिया। प्रधानाचार्य का जवाब इस मेल के साथ संलग्न है।
महोदय, केन्द्रीय विद्यालयों द्वारा प्रवेश के लिए आए  सभी फाॅर्म आरटीई की लाटरी में शामिल कर रहे हैं, उनकी इस व्यवस्था से सक्षम और नौकरी पेशा के बच्चों का नाम आरटीई की लाटरी में आ जाता है और साक्षी जैसी हजारों बच्चियों जो आरटीई की वास्तविक हकदार हैं, यह सुविधा माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन के बाद भी नही पा पाती हैं। लाटरी की यह प्रक्रिया आरटीई सुविधा के साथ अन्याय और  गरीब बच्चों को हतोत्साहित करने वाली है।
अतः इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से आपसे विनम्र निवेदन है कि सक्षम अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन को निर्देशित करने की कृपा करें कि 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया से  प्रवेश के लिए आवेदित फाॅर्म में से साक्षी जैसे वास्तविक गरीब बच्चों के फार्म उनके अभिभावकों की आय और स्तर देखकर अलग छाॅटकर उनको ही आरटीई की लाटरी में शामिल किया जाए ताकि आरटीई में पात्र बच्चों का ही प्रवेश हो पाए न कि उनका जोकि फीस देने में सक्षम है।
ऐसा उपाय किए जाने से ही आरटीई सुविधा का सदुपयोग हो पाएगा वरना पात्र बच्चे इस सुविधा से वंचित होते रहेंगे।
कृत्य कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराने की कृपा की जाए।

सादर सहित।

निवेदक
मुकेश कुमार
मकान नम्बर 594डी/300 ए,
शिखर भवन,
निलमथा, दुर्गापुरी कालोनी,
लखनऊ 226602

लघुकथा.......नजरिया बदलो


अचानक शुरू हुई तेज बरसात से बचने के लिएा तमाम राहगीर एक बड़े से पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हो गए, पेड़ बहुत विशाल और पुराना था उसकी जड़ में एक चबूतरा भी बना था जिस पर लोगों ने कई भगवानो की मूर्तियाॅ भी रख दी थी। बरसात रूकते ही सब लोग पुनः अपनी राह पर चलने के लिए पेड़ के साए से निकलने लगे। बरसात में रूके एक बुजुर्ग अपने साथ खड़े एक छोटे बच्चे का हाथ पकड़ते हुए चबूतरे पर रखे भगवानों के हाथ जोड़ते हुए निकलने लगे। बुजुर्ग के हाथ जोड़ने के कार्य को देख बच्चे को उत्सुकता हुई और उसने प्रश्न किया दादाजी आपने उन मूर्तियों को हाथ क्यों जोड़ा । ‘ बेटा जो मुसीबत में आपका साथ दे हाथ जोड़कर उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए, ऐसा हमारे धर्म में कहा गया है।’ बुजुर्ग ने बच्चे को जवाब दिया। बच्चे ने फिर सवाल किया ‘पर अपने धर्म में तो मूर्ति पूजा करना मना है, फिर आपने मूर्तियों के हाथ क्यों जोड़े।’
‘बेटा हमारे धर्म में मूर्ति पूजा करना मना है लेकिन किसी दूसरे धर्म के भगवान का सम्मान करना थोड़ी मना है और अगर तुम्हें लग रहा है कि मैंने मूर्तियों को हाथ जोड़ा तो तुम अपना नजरिया बदल लो।’ बुजुर्ग ने कहा।
बच्चे ने पूछा ‘वो कैसे‘ ?
बजुर्ग ने कहा ‘जब तेज बारिश हो रही थी तो हम बचने के लिए कहाॅ रूके थे’ ? बच्चे ने कहा पीपल के नीचे ।
बजुर्ग ‘ तो बेटा क्या हमें पीपल का शुक्रिया अदा नही करना चाहिए ? करना चाहिए बच्चे ने कहा। तो बेटा समझ लो मैं पीपल के पेड़ को हाथ जोड़कर शुक्रिया किया।
बच्चे ने कहा ‘अच्छा दादाजी मैं समझ गया, हमें सबका सम्मान करना है अगर कहीं धार्मिक पक्ष आड़े आ रहा है तो हमें अपना नजरिया बदल लेना चाहिए।‘
बजुर्ग ने कहा ‘ हाॅ सलीम बेटा। दोनो आपस में बात करते हुए अपनी राह पर चल दिए।

गुरुवार, अप्रैल 16, 2020

Request to the HRD Minister Ji

सेवा में,
माननीय मंत्री जी
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
भारत सरकार, नई दिल्ली

महोदय,
सादर प्रणाम, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर, लखनऊ की एक गरीब बच्ची साक्षी पुत्री श्री प्रेम लाल का कक्षा प्रथम में प्रवेश हेतु  फार्म केन्द्रीय विद्यालय लखनऊ में भरवाया था । गरीब, अनुसूचित जाति एंव बेटी होने के बावजूद साक्षी का प्रवेश राईट टू एजूकेशन की कैटेगरी मे नही हो सका।
इसके बाद मैंने स्थानीय स्तर पर सकारात्मक सहयोग न मिलने के कारण इस बच्ची की फीस माफी हेतु माननीय प्रधानमंत्री जी तक निवेदन पहुॅचाने के लिए  पीजी पोर्टल पर निवेदन किया जिसका सन्दर्भ नम्बर था।
महोदय, बहुत ही अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केन्द्रीय विद्यालय के जिम्मेदारों ने माननीय प्रधानमंत्री जी से किए गए इस विशेष निवेदन को लालफीताशाही के फेर में डालकर नकारात्मक रूप से  प्रधानाचार्य ने इस जवाब के साथ कि आरटीई के तहत प्रवेश के लिए जो लाटरी डाली गयी थी उसमें आपके पाल्य का नाम नही निकला अतः आरटीई के तहत प्रवेश नही हुआ । अतः फीस माफी की सुविधा नही दी जा सकती है, समाप्त कर दिया। प्रधानाचार्य का जवाब इस मेल के साथ संलग्न है।
महोदय, केन्द्रीय विद्यालयों द्वारा प्रवेश के लिए आए  सभी फाॅर्म आरटीई की लाटरी में शामिल कर रहे हैं, उनकी इस व्यवस्था से सक्षम और नौकरी पेशा के बच्चों का नाम आरटीई की लाटरी में आ जाता है और साक्षी जैसी हजारों बच्चियों जो आरटीई की वास्तविक हकदार हैं, यह सुविधा माननीय प्रधानमंत्री जी से निवेदन के बाद भी नही पा पाती हैं। लाटरी की यह प्रक्रिया आरटीई सुविधा के साथ अन्याय और  गरीब बच्चों को हतोत्साहित करने वाली है।
अतः इस प्रार्थना पत्र के माध्यम से आपसे विनम्र निवेदन है कि सक्षम अधिकारी, केन्द्रीय विद्यालय संगठन को निर्देशित करने की कृपा करें कि 2020-21 की प्रवेश प्रक्रिया से  प्रवेश के लिए आवेदित फाॅर्म में से साक्षी जैसे वास्तविक गरीब बच्चों के फाॅर्म उनके अभिभावकों की आय और स्तर देखकर अलग छाॅटकर उनको ही आरटीई की लाटरी में शामिल किया जाए ताकि आरटीई में पात्र बच्चों का ही प्रवेश हो पाए न कि उनका जोकि फीस देने में सक्षम है।
ऐसा उपाय किए जाने से ही आरटीई सुविधा का सदुपयोग हो पाएगा वरना पात्र बच्चे इस सुविधा से वंचित होते रहेंगे।
कृत्य कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराने की कृपा की जाए।

सादर सहित।

निवेदक
मुकेश कुमार
मकान नम्बर 594डी/300 ए,
शिखर भवन,
निलमथा, दुर्गापुरी कालोनी,
लखनऊ 226602

शनिवार, अप्रैल 11, 2020

रोता रहेगा दिल मेरा चैन से सो भी न पाऊॅगा, मेरे दायरे मे कोई भूखा हो तो मैं कैसे खाऊॅगा।......नादान

कलमकार की कलम बड़ी चंचल होती है, जो उसका क्षेत्र नही होता वहाॅ भी पहुॅच जाती है, कुछ कर भले ही न पाए लेकिन लिखने से बाज नही आती, कुछ दिन पहले मेरे अन्दर एक मानसिक द्वंद्व चल पड़ा कि कोरोना के इस दौर में उन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों एंव समाज सेवकों की क्या जिम्मेदारी होनी चाहिए जिनके  क्षेत्र के लोग बेरोजगार हो गए हों और परिवार के सामने  भूखों रहने की नौबत आ जाए।
बस साहब, उठायी कलम और शेरों वाली दो लाईन लिख डाली, आज अखबार में देखा इन लाईनों को हेडलाईन्स बनते और साथ ही तस्वीर भी छपी उन महानुभावों की जो वास्तव में मानवकल्याण में आगे हैं। धन्यवाद, सम्पादक महोदय और आपकी टीम को आपके अखबार को।





शुक्रवार, अप्रैल 10, 2020

किसी मुस्कुराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, जीना इसी का नाम है.......गायक मुकेश

Shri Amit Kumar Mishra, IDES, CEO, Cantt Board, Lucknow


रोता रहेगा दिल मेरा चैन से सो भी न पाऊॅगा,
मेरे दायरे मे कोई भूखा हो तो मैं कैसे खाऊॅगा।
                                                      नादान

मेरे द्वारा लिखी गयी उपरोक्त पंक्तियाॅ सफेद कमीज में मुस्कुराते हुए हरदिल अजीज अधिकारी जोकि दूसरी तस्वीर में काली कैप और काले अपर पहने रोटी बेलते हुए महोदय पर सटीक बैठ रही है, यह तस्वीर है लखनऊ कैन्ट के सदर बाजार की जहाॅ पर भोजन बैंक में खाना तैयार हो रहा है, रोटी बेलते हुए साहब हैं श्री अमित कुमार मिश्रा जी, आई0डी0ई0एस0, सीईओ, छावनी परिषद, लखनऊ।
01.
लाॅकडाउन के कारण क्षेत्रीय एंव आसपास के जरूरतमन्दों के साथ साथ छोटे और खुदरा काम करने वाले कामगारों को स्वंय के सहयोग से लगातार भोजन उपलब्ध कराने के निःस्वार्थ भाव से भोजन बैंक की स्थापना की शुरूआत की उपाध्यक्ष आदरणीय रूपा देवी जी ने और सहयोग दिया श्री रतन सिंघानिया जी, पूर्व उपाध्यक्ष, श्री अशफाक कुरैशी जी, पूर्व मा0 सदस्य, श्रीमती रीना सिंघानिया जी,मा0 सदस्य, श्री संजय दयाल वैश्य जी,मा0 सदस्य,  श्री अमित शुक्ला जी,मा0 सदस्य,  श्रीमती स्वाति यादव जी, मा0 सदस्य एंव श्री विकास यादव जी, समाजसेवी, इसके अतिरिक्त भोजन बैंक के संचालन में तमाम कारीगर और लेबर निःशुल्क सेवा दे रहे हैं ।
02.
इस भोजन बैंक को संचालित करने में श्री अमित कुमार मिश्रा जी, सीईओ छावनी परिषद, लखनऊ ने प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक, मानसिक, शारीरिक, भौतिक,आत्मिक सभी प्रकार का सहयोग प्रदान करके वास्तविक मानवीय सेवा का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि हर व्यक्ति में भोजन बैंक संचालित करने वाले आदरणीयों सी सोच आ जाए तोे शायद देश में भूख से कोई मौत नही होगी।
03.
मानव कल्याण की इस अनुपम  सेवा के लिए मुझ जैसे करोड़ो लोग आपको समय समय पर याद करेंगे और जब कभी मानवता की बात चलेगी तो  आप सभी का नाम सबसे प्रथम पंक्ति में लिखा और सम्बोधित किया जाएगा।
सादर सहित। मुकेश नादान 11 अप्रैल 2020

गुरुवार, अप्रैल 09, 2020

जयसंविधान वोट की ताकत ...................

मनुष्य जिन पैरों के सहारे खड़ा होता है और जिस पीठ और नीचे के हिस्से के सहारे लेटता बैठता है उनको ही सबसे ज्यादा नजरअंदाज करता है, उसका पूरा ध्यान चेहरे को चमकाने मे लगा होता है, लेकिन जो पैर उसके जीवन को गतिमान बनाते हैं,  पीठ और नीचे का जो हिस्सा उसको सबसे ज्यादा आराम देते है, उनकी वो सबसे ज्यादा उपेक्षा करता है।
यही हाल हमारे कुछ जनप्रतिनिधियों का है, जिनके वोट से और जिस जनता के लिए उन्हें पद और प्रतिष्ठा मिली है वो उनको नजर अन्दाज करके सारी निष्ठा और समर्पण  राग दरबारी ( इसे आम भाषा में चमचागिरी कहते हैं) के साथ साथ  पार्टी आलाकमान, देश मुखिया, प्रदेश मुखिया और भिन्न भिन्न प्रकार के  मुखियाओं के इर्द गिर्द ही  रहती है।

कोरोना महामारी भी हमारे कुछ जनप्रतिनिधियों के आचरण और व्यवहार को बदल नही पायी, ऐसे महानुभाव के वर्तमान आचरण से प्रेरित होकर ही मतदाता भविष्य के मतदान से उनको हमेशा के लिए इतिहास बना देता है, क्योंकि वोट रूपी पवित्र ताकत अभी भी उस गरीब के पास ही है और रहेगी जिसको आप नजरअंदाज कर रहे हैं, आपकी बेरूखी और लफ्फाजी तो उसके वोट की ताकत को कम नही कर पाएगी लेकिन उसकी बेरूखी आपके रूतबे को धराशयी करने में सक्षम थी, सक्षम है और सक्षम रहेगी।............................जयसंविधान ।

बुधवार, अप्रैल 08, 2020

भय बिन होय न प्रीत.....


भय बिन होय न प्रीत......इन पाॅच शब्दों में गहरा रहस्य छिपा है कि जब भी मनुष्य पर मुसीबत आती है तो वो उस मुसीबत से निजात दिलाने वाले लोगों के लिए कितना संस्कारी और नरम हो जाता है, भले ही सामान्य दिनों में अपशब्दों से लेकर मारपीट करने में पीछे न रहता हो, जब कारगिल का युद्व चल रहा था तो लोगो में सेना के प्रति सम्मान चरम पर था, भले ही फौजी भाई को रेल मे बैठने को सीट न दें, गाॅव मे उनकी जमीन कब्जा कर लें, इस दौर में जो सम्मान उनका मिल रहा था उसमें उनके कर्म से ज्यादा अपनी सुरक्षा नजर आ रही थी।
आज के अखबर में एक तस्वीर छपी, देखी, पढ़ी मन में कुछ विचार आए जो आपके सामने साझाा कर रहा हूॅ, तस्वीर इस लेख के नीचे दिख रही है। कोरोना से लड़ने वाले इज्जतकर्मियों का सम्मान किया गया। (इज्जतकर्मी नाम मोदी जी ने दिया है, हालांकि लोग इस नाम को प्रयोग करने मे इज्जत महसूस नही करते हैं ) इसके अलावा शीतला माता के हाथ में झाड़ू  इज्जतकर्मियों की महत्ता पर प्रकाश डालने के लिए काफी है ।  
यह वो इज्जतकर्मी हैं जो हर मौसम में मौसम के सितम सहता है, महसूस कीजिए आपके गल्ली मोहल्ले और शहर की सलामती के लिए ये खुद को जोखिम में डाले हुए हैं, उसके बावजूद इसे संस्थाएं एंव ठेकेदार कटौती करके तीन तीन महीने बाद वेतन देते है, दो कौड़ी का व्यक्ति भी गाली दे देता है, दबंग क्षेत्रीय व्यक्ति या नेता जरा सी बात पर पूरे खानदान को तौल देता है । कलेजा हिल जाता है जब अखबार में खबर आती है कि 23 साल का कल्लू सीवर में दम    घुटने से मरा, पिछले महीने हुई थाी शादी।
क्या कल्लू का गुनाह यह था कि वो परिवार को चलाने के लिए यह काम करता था या उसका गुनाह यह था कि वो इस काम के अलावा दूसरा काम क्यों नही कर रहा था।
दोस्तों, सम्मान के वास्तविक हकदार यही हैं, सिर्फ कोरोना काल में नही हर काल में, हम सबका जीवन और  सेहत साफ सफाई के वातावरण में ही सुरक्षित हैं, इसलिए आप सब से निवेदन है कि इनको हमेशा इज्जत दीजिए और एक फूल माला से नही अगर आप इसमें से किसी एक के बच्चे को उच्चशिक्षित होने में मदद कर दें तो आपका यह प्रयास समाज और देश के लिए हितकारी होगा। इनमें से कई इज्जतकर्मी तो ऐसे हैं जो यह सपना देखते हैं कि उनके बच्चे भी पढ़ लिखकर कुछ बन जाएं, इनके बच्चे योग्य भी है, लगनशील भी हैं, कमी है तो बस मार्गदर्शन की। अब गेंद आपके पाले में हैं कि आप मौकापरस्त हैं या वास्तविक और निरंतर इज्जत देने वाले।
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