मंगलवार, अप्रैल 28, 2020

कोरोना योद्धाओं को समर्पित मेरी कविता


कोरोना योद्धाओं को समर्पित मेरी कविता को अवधनामा अखबार ने 
छापकर सम्मानित किया आपका आभार सम्पादक महोदय और आपकी टीम को
लेकिन इन्होनें मुझे नादान मानने से इंकार कर दिया और मुकेश कुमार ही चित्र के साथ छापा है


सोमवार, अप्रैल 27, 2020

जन्मदिन की शुभकामनाएं हमारी बिटिया रानी को,

हम सबकी मुस्कान है बिटिया,
सब रिश्तों की शान है बिटिया,
तुम लायी हो घर मे खुशियाॅ
यह तुम्हारा एहसान है बिटिया।






जन्मदिन की शुभकामनाएं हमारी बिटिया रानी को,
सदा मुस्कुराती रहो, सदा खुशियाॅ मेहरबान रहे,
खूब करो तरक्की बेटा ऊॅची  सबकी शान रहे।......

रविवार, अप्रैल 26, 2020

सुस्ती बनी चुस्ती

आप बीतीः लगभग एक सप्ताह से सवेरे सोकर उठने के बाद सुस्ती सी लगती थी, नींद भी पूरी ले रहा था हाॅ रात में सोने मे देर हो रही थी पढ़ने लिखने की आदत के कारण कभी किताबों से कभी कम्प्यूटर से ज्ञान समेटने के कारण समय से खुद को बिस्तर पर फैलाने में थोड़ी देर हो रही थी, चंचल मन ने सुस्ती का इल्जाम इन्हीं ज्ञान समेटने वाली विधाओं को देकर खुद को निर्दोष साबित कर दिया।
आज सवेरे उठने के लगभग एक घन्टे के बाद चित्त में ताजगी का जो संचार महसूस हुआ उसे शब्दों में बयान नही कर सकता बस आप महसूस कर सकते हैं, यह चमत्कार हुआ सवेरे डिजीटल पेपर पढ़ते पढ़ते रफी साहब, मुकेश साहब, लता जी, मो0अजीज जी, लक्ष्मीप्यारे जी, राजा मेहन्दी अली खाॅ जी के कुछ गााने सुनने के बाद। अब समझ में आया कि सुस्ती का कारण शारीरिक नही मानसिक था जो मनपसन्द गाने सुनकर चुस्ती में तब्दील हो गयी।

कोरोना योद्धाओं का काव्य सम्मान


सुनी हुई सड़कें सारी, आना जाना बन्द हुआ,
तन से उतरी न खाकी, और न थाना बन्द हुआ,

यूॅ ही नही कहते हैं लोग, धरती का भगवान इन्हें,
मन्दिरों मेें ताले लगे,  पर ना दवाखाना बन्द हुआ,

जान जोखिम में डालकर , पूरा देश सम्भालें हैं,
महामारी में सफाईवालों का, ना फर्ज निभाना बन्द हुआ,

मदद गरीबों की करने को, सरकार भी आगे आ गयी,
काम बढ़ा स्टाफ नही , ना बैंकों का खजाना बन्द हुआ

बिजली वाले भी डटे रहे, गैस वाले भी लगे रहे,
टी वी चैनल भी मुस्तैद रहे, अखबार  ना आना बन्द हुआ,

अफसर भी सतर्क दिखे, भोजन राशन बाॅट रहे,
सोशल मीडियाबाजों का, ना इल्जाम लगाना बन्द हुआ,

आटा की दिक्कत हुई पर, डाटा खूब भरपूर मिला,
रामायण दिखा दूरदर्शन का, ना पुण्य कमाना बन्द हुआ,

नादान यह समझ लो तुम  लाॅकडाउन में घर में रहना है
गया नही कोरोना अभी ना यमराज का आना बन्द हुआ ।

बुधवार, अप्रैल 22, 2020

रिश्ते का रिचार्ज कर दिया प्रधानमंत्री जी ने.........................


भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की विधान सभा के माननीय अध्यक्ष व 403 माननीय विधायकों के मुखिया आदरणीय दीक्षित साहब जी का ऊर्जावान लेख


मुख्यमंत्री योगी का पिता की मृत्यु होने पर भी प्रदेश को न छोड़ना एंव अंतिम दर्शन को न जाना एक ऐसी नजीर जिसने रिश्ते को नही सूबे की आवाम को तरजीह दी...................पढ़िए मुकेश नादान की कलम से


          पिता से भी बढ़कर, आपके आवाम से रिश्ते निकले
          हम तो इंसान समझे योगीजी आप तो  फरिश्ते निकले ।...नादान

जी हाँ, ऊपर लिखी मेरी दो पंक्तियाँ बिल्कुल वाजिब हैं सूबे के सबसे बड़े राजनीतिक ओहदे पर बैठे सन्त की शान में जिसने 23 करोड़ प्रदेश की आवाम को कोरोना महामारी से निजात दिलाने के लिए फैसला किया कि वो मरहूम हुए पिता के आखिरी दीदार और जनाजे में शामिल नही होंगे।

20 अप्रैल 2020 को दोपहर को सारे टी0वी0 चैनलों पर एक ही खबर बार बार दिखायी जा रही थी और वो खबर थी दिल्ली के एम्स में भर्ती आनन्द सिंह बिष्ट जी के निधन की, 90 साल के बिष्ट जी पिछले कुछ समय से बीमार थे और उनका इलाज नई दिल्ली के एम्स में चल रहा था ।
कभी कभी व्यक्ति का परिचय व्यक्ति के  व्यक्तित्व से बहुत बड़ा हो जाता है, यह सौभाग्य दिवंगत बिष्ट जी को मिला था अपने पुत्र के सुकर्मों से, जी हाँ देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता थे आनन्द सिंह बिष्ट जिनके देहान्त की खबर से पूरा देश शोकाकुल हो गया था।
पिता के देहान्त की सूचना सुनकर कोई भी विचलित हुए बिना नही रह सकता जो जहां भी होगा जिस भी स्थिति में होगा जल्दी से जल्दी पिता के अंतिम दर्शन करने को रवाना हो जाएगा । लेकिन सर्वसुलभ सुविधा युक्त कोई पुत्र अपने संवैधानिक जिम्मेदारियों के मद्देनजर  यह फैसला ले ले कि वो पिता के अंतिम दर्शन को नही जाएगा तो वाकई वो बहुत ही बड़े जिगर वाला कर्मयोगी होगा।
शायद इस मामले में पहली बार जिम्मेदारी ने रिश्तेदारी को पीछे कर दिया, इसको सही साबित कर दिया है प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वभर में फैले कोरोना महामारी के इस काल में अधिकारियों के साथ पल पल की जानकारी लेकर प्रदेश को इस महामारी से मुक्त कराना उनकी पहली प्राथमिकता है वरना भारतीय राजनीति में आज तक ऐसा उदाहरण नही मिला कि कोई उच्च सरकारी सुविधा सम्पन्न पुत्र अपने संवैधानिक दायित्वों के लिए अपने पिता के अंतिम दर्शन का त्याग कर दे।
20 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास पर अधिकारियों की मीटिंग ले रहे योगी को सूचना मिलती है कि पिताजी का देहान्त हो गया है, एक मिनट से कम समय में भी परिवारजनों से बात करके भारी दिल, नम आँखों एंव भरे गले के साथ फिर प्रदेश की जनता के कल्याण  और कोरोना को हराने की रणनीति की रूपरेखा बनाने में व्यस्त हो गए। मौजूद अधिकारियों ने सिर्फ योगी की भावभंगिमा से ही किसी अनहोनी को भाप लिया था।
मीटिंग समाप्त करके योगी ने अपनी माताजी को सम्बोधित एक पत्र जारी किया जिसमें लिखा कि  पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे बहुत गहरा दुख और शोक है, अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, परन्तु प्रदेश के 23 करोड़ जनता के हित के मद्देनजर और अपने कर्तव्यबोध के कारण मै उनके दर्शन न कर सका। कोरोना महामारी को परास्त करने की रणनीति के कारण 21 अप्रैल को उनके अंतिम संस्कार में भाग नही ले पा रहा हॅू। पूजनीया मां आप सभी से अपील है कि लाॅक डाउन का पालन करते हुए कम से कम लोग अंतिम संस्कार में भाग लें। लाॅकडाउन के बाद दर्शनार्थ आऊॅगा।

आखिर में, लाॅकडाउन के मद्देनजर दूरदर्शन के द्वारा पुनः प्रसारित की जा रही महर्षि वाल्मीकि रामायण के एक वाकिए का जिक्र किया जाना प्रासंगिक होगा, वो यह कि प्रभु श्रीराम भी अपने पिता के अंतिम संस्कार में शिरकत नही कर पाए थे, क्योंकि वो उस समय अपने वंश की परम्परा को बचाने और पिता की हुक्म की तामील में दूरस्थ प्रदेश में चैiदह वर्ष के वनवास में थे और आज योगीजी प्रदेश को बचाने और अपने पद की गरिमा को श्रेष्ठता प्रदान करने के लिए अपने पिताजी के प्र्रदेश से दूर हैं। परिस्थितियाॅ योगी जी और प्रभु श्रीराम जी की अलग अलग हैं लेकिन दोनो की सेवा और त्याग एक जैसे ही प्रतीत हो रहे है। रामायण के इसी प्रसंग के  मद्देनजर योगी जी को समर्पित दो पंक्तियाँ:
वो भी शामिल न हो सके थे, पिता के अंतिम संस्कार में,
योगीजी आप दिख रहे हैं मुझे प्रभु श्रीराम से किरदार में।

खबरों से यह पता चला है कि पिता आनन्द सिंह बिष्ट अपने संन्यासी पुत्र मुख्यमंत्री योगी को महाराज कहकर सम्बोधित करते थे, शायद उन्हें पहले ही यह एहसास रहा होगा कि ये महाराज देश के सबसे बडे़ राज्य का महाराज बनकर अपनी सेवा और त्याग से उनका नाम रोशन करेगा। कोटि कोटि नमन मरहूम बिष्ट साहेब को।