सोमवार, अगस्त 22, 2022

चुरा के दिल तमाम का................


 

खाने से ज्यादा आदमी दवाई खा रहा है....................

रिश्वत या हराम की कमाई खा रहा है,
खाने से ज्यादा आदमी दवाई खा रहा है,

मयस्सर नही बच्चों को दूध एक वक्त
साहब के घर कुत्ता मलाई खा रहा है,

होकर बड़ा आदमी कालोनी में जा बसा,
खामोशी पी रहा है अब तन्हाई खा रहा है,

शौहर कमाकर खिलाए तो कोई बात नही,
बेगम कमाए तो कहे औरत की कमाई खा रहा है

बाप दादा का नाम मिटटी में मिलाकर
अपनी को बेच जमीन पराई खा रहा है,

जैसी करनी वैसी भरनी देख ले नादान,
घर दमादू के घर बैठकर घर जमाई खा रहा है।
@Nadan


शुक्रवार, जनवरी 21, 2022



 अपनी खामियॉ किनारे करके देखिए,

जमाना खूबियॉ गिनाएगा मरके देखिए।

हम नशे में थे......



 तुम ज्यादा थे या कम नशे में थे,

हम कैसे बताएं खुद हम नशे में थे,


जश्न जन्मदिन का पीकर मनाने वाले,

मौत का मना रहे मातम नशे में थे,


तेरी सितमगरी का कभी बुरा नही माना,

हम पर किए गए तेरे सितम नशे में थे


मुफ्त पीने वाले इफरात पीकर गिर पडे़,

जेब से पीने वाले मिले कम नशे में थे,


ज्यादा पीने वालों को छोड़ दिया पुलिस ने,

जेल भेजे गए वो जो कम नशे में थे,


खुशी के मौके पर पी लेता हूॅ थोड़ी सी

ये कहने वाले नादान मिले हरदम नशे में थे ।

@ Nadan