मौका है संजय हिरवानी जी के वैवाहिक कार्यक्रम का दिनाक २० मई २०११ जिसमे शामिल होने का शौभाग्य हमें भी मिला..यह कार्यक्रम विन्द्यावासिनी स्कूल लखनऊ में संपन्न हुआ था ...........बधाइयाँ
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ढॅूढतेे हो छायीं पेड़ को उखाड़कर, बने हैं कई मकान रिश्ते बिगाड़कर, तालीम भी तुमसे बदनाम हो गयी, पायी है डिग्री जो तुमने जुगाड़कर, ...
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तुम ज्यादा थे या कम नशे में थे, हम कैसे बताएं खुद हम नशे में थे, जश्न जन्मदिन का पीकर मनाने वाले, मौत का मना रहे मातम नशे में थे, तेरी सित...
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