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शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

वो जमाना अच्छा था

गरीब था हर शख्स
पर सच्चा था
आज के ज़माने से
वो जमाना अच्छा था

अब तो अपने भी
इज्ज़त करना भूल गए
उस वक़्त इज्ज़त देता
मोहल्ले का हर बच्चा था ..............आज के ज़माने से

पक्का हुआ मकान जब से
जेब खाली हो गई
दो चार हज़ार पास थे
जब घर अपना कच्चा था ...........आज के ज़माने से

रविवार, सितंबर 12, 2010

यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे


फेमिना के बगल में शिखर उनके बगल में अनसु लखनऊ की दिलकुशा कालोनी में ईद के मौके पर .............हैप्पी ईद

बचपन की दोस्ती


चारों सहेलियां केंद्रीय विद्यालय लखनऊ केंट में पढ़ती है ईद के मौके पर फेमिना ने सेवई की दावत दी थी सबसे लेफ्ट शालिनी उसके बाद अनसु फिर फेमिना और हिना ...........हैप्पी ईद

मंगलवार, सितंबर 07, 2010

ईद मुबारक!


ख़ुदाया बना कोई ऐसा निज़ाम,
जहाँ
सबकी ख़ुशियों का हो इंतज़ाम
रहे
गर बाक़ी कोई बदनसीब,
तो
हो जाए 'अनवार' अपनी भी ईद

शनिवार, सितंबर 04, 2010

सारे जहाँ से अच्छा से हिंदुस्तान हमारा


शालिनी, मानस और शिखर तीनो १५ अगस्त २०१० को स्कूल जाने के लिए तैयार तीनो ख़ुशी दिखाई दे रहे लड्डू मिलेंगे न भाई तो खुश क्यों न हो...................................

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब


०९ अगस्त २०१० यह मानस के जीवन का सबसे ख़ास दिन आज से यह मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल दुर्गापुरी निलमथा, लखनऊ केंट के स्टुडेंट हो गए है सोमवार का यह दिन इनके जीवन के लिए ख़ास रहेगा


यह है मानस जी स्कूल का नाम अखिल उमेश यह हसी यूँही बनी रहे इसलिए इन्हें स्कूल भेजना जरुरी है यानी शिक्षा दिलाना हालाँकि यह ३ साल के है पर अक्ल में दोगुना आगे हाज़िर जवाब