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शनिवार, दिसंबर 18, 2010

Mukesh nadan with a smily face
Mukesh nadan with his daughter shalini and son shikhar at New Delhi on 10th Dec 2010 in a marriage party.
Shalini and Shikhar both were visited at Chhatarpur Temple in New Delhi on 9th Dec 2010.
janab Rakesh at Qutubminar in New Delhi on 10th Dec 2010, the pose keep in camera by mukesh nadan
Sheetal, Shalini, Rakesh and Mukesh nadan On 9th Dec 2010 at Chhatar pur Mandir New Delhi
9th Dec 2010 Shikhar, Sheetal,Shalini and Rakesh visit at Chhatarpur Temple, New Delhi.
Mukesh 'nadan' at Kasauli distt Solan in Himanchal Pradesh in 2009.
Mukesh 'nadan' with Ustad Amjad Ali khan in 40th International Film Festival at Goa in 2009
Mukesh 'nadan' with Ustad Amjad Ali khan at Goa International Film Festival at Goa in 2009
Mukesh 'nadan' with famous music director Anand ji ( Kalyan ji anand ji)at Goa in International Film Festival 2009
Mukesh 'nadan' with Gulzar saheb in 2009 at Goa International Film Festival.
Mukesh 'nadan' with Nana Patekar in 2009 international Goa Film Festival

शुक्रवार, अक्तूबर 15, 2010

भारतीय पहनावा


यह है शालिनी आज इन्होने पहली बार अपनी मदर की साडी पहनी और इस तस्वीर में अपनी वास्तविक उम्र से कुछ बड़ी दिख रही है पर बहुत खुश है की इनको सारी बाँधने की इजाजत मिल गई

शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

वो जमाना अच्छा था

गरीब था हर शख्स
पर सच्चा था
आज के ज़माने से
वो जमाना अच्छा था

अब तो अपने भी
इज्ज़त करना भूल गए
उस वक़्त इज्ज़त देता
मोहल्ले का हर बच्चा था ..............आज के ज़माने से

पक्का हुआ मकान जब से
जेब खाली हो गई
दो चार हज़ार पास थे
जब घर अपना कच्चा था ...........आज के ज़माने से

रविवार, सितंबर 12, 2010

यह दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे


फेमिना के बगल में शिखर उनके बगल में अनसु लखनऊ की दिलकुशा कालोनी में ईद के मौके पर .............हैप्पी ईद

बचपन की दोस्ती


चारों सहेलियां केंद्रीय विद्यालय लखनऊ केंट में पढ़ती है ईद के मौके पर फेमिना ने सेवई की दावत दी थी सबसे लेफ्ट शालिनी उसके बाद अनसु फिर फेमिना और हिना ...........हैप्पी ईद

मंगलवार, सितंबर 07, 2010

ईद मुबारक!


ख़ुदाया बना कोई ऐसा निज़ाम,
जहाँ
सबकी ख़ुशियों का हो इंतज़ाम
रहे
गर बाक़ी कोई बदनसीब,
तो
हो जाए 'अनवार' अपनी भी ईद

शनिवार, सितंबर 04, 2010

सारे जहाँ से अच्छा से हिंदुस्तान हमारा


शालिनी, मानस और शिखर तीनो १५ अगस्त २०१० को स्कूल जाने के लिए तैयार तीनो ख़ुशी दिखाई दे रहे लड्डू मिलेंगे न भाई तो खुश क्यों न हो...................................

पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब


०९ अगस्त २०१० यह मानस के जीवन का सबसे ख़ास दिन आज से यह मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल दुर्गापुरी निलमथा, लखनऊ केंट के स्टुडेंट हो गए है सोमवार का यह दिन इनके जीवन के लिए ख़ास रहेगा


यह है मानस जी स्कूल का नाम अखिल उमेश यह हसी यूँही बनी रहे इसलिए इन्हें स्कूल भेजना जरुरी है यानी शिक्षा दिलाना हालाँकि यह ३ साल के है पर अक्ल में दोगुना आगे हाज़िर जवाब

सोमवार, अगस्त 30, 2010

हम बच्चे हिंदुस्तान के


केंद्रीय विद्यालय लखनऊ केंट की टीचर शोभना कुमार के साथ शिखर और दीक्षा जिन्होंने डिज्नीलैंड का प्रोजेक्ट बनाया

शुक्रवार, अगस्त 27, 2010

सौभाग्य मेरा


चौंदहवी का चाँद हो, छू लेने दो नाजुक होंठो को, बीते हुए लम्हों को कसक साथ तो होगी आदि लाजवाब गीतों के संगीतकार मैरून कमीज में रवि साहेब के साथ नवम्बर २००९ में गोवा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सफ़ेद कमीज में मुकेश नादान

सोमवार, अगस्त 23, 2010

अलगाव वादियों होशियार

नमक हिंदुस्तान का खाते रहिये
पाकिस्तान जिंदाबाद नारा लगाते रहिये

कश्मीर है हमारा इसे छीन न सकोगे
लड़िये हर बार और मुह की खाते रहिये ............

हम पत्थर नहीं हर वक़्त मददगार है
भूकंप हो या बाढ़ आजमाते रहिये .........................

दुश्मनी करके हो जाओगे तबाह एक दिन
चीन के झांसे में यूँ न आते रहिये .......................

दौर है कठिन इतराना छोड़ दे
कबूल कर मदद माथे से लगाते रहिये ....................

भाई भतीजावाद

न नक्सल से खतरा है
न डर है आतंकवाद से
देश मेरा बर्बाद हो गया
भाई भतीजावाद से ..............

डिग्री लेकर देशभक्त
बन बैठा है संतरी
अनपढ़ बीवी को नेता जी
बना बैठे मुख्यमंत्री

किसी ने चारा बेच दिया
कोई कमाया यूरिया खाद से .......देश मेरा बर्बाद ................

चपरासी बन ने के खातिर
आठवां पास जरूरी
बिना पढ़े लिखे बने मंत्री
ऐसी क्या मजबूरी

यमराज जी हमें बचा लो
नेता रुपी जल्लाद से ...................देश मेरा बर्बाद ...................

रविवार, अगस्त 22, 2010


पैसे की खातिर ईमान बेच देंगे
पहले जमी फिर आसमान बेच देंगे
तालीम की कीमत पर घर न सजाना
वर्ना बाद तेरे बच्चे सब सामान बेच देंगे
ए कलम के सिपाहियों जागते रहना
ये जनता के सेवक हिंदुस्तान बेच देंगे
ए खुदा आज ही दे दे मौत मुझको
कल समाज के ठेकेदार शमशान बेच देंगे

मंगलवार, अगस्त 17, 2010

हम एक है


फिल्म प्रभाग भारत सरकार लखनऊ शाखा के सभी साथी श्री मिश्री लाल जी के सेवानिवृति के मौके पर मौजूद सभी साथीगण

सभी धर्मो को आदर करो


सभी धर्मों के आदर में हम सब को शीश झुकाना चाहिए ...............

इश्वर एक है नाम भिन्न है


सभी धर्मो का श्रोत एक है इसलिए जात पांत की कोई बात नहीं होनी चाहिए..............क्यों भाई ठीक है न .

शुक्रवार, अगस्त 13, 2010

सुनहरी यादें


श्री एस पी सिंह फिल्म्स डिविजन भारत सरकार के कंप्यूटर पर नादान

फिल्म्स डिविजन भारत सरकार के श्री एस के शर्मा ,श्री के एन रस्तोगी, श्री एस पी सिंह के साथ सफ़ेद शर्ट में नादान

बुधवार, अगस्त 11, 2010


यह कौन चित्रकार है .....................

शनिवार, जुलाई 24, 2010


चार दिन की ज़िन्दगी लुफ्त उठाते रहिये
शहर में अपनी भी पहचान बनाते रहिये
कौन है ज़माने में जिसे गम नहीं
अपनों के बीच यूँही मुस्कराते रहिये

दोस्त दो न रहा


अजब ज़माने का
मंजर दिखाई देता है
जहाँ कल खेत थे
वहां बंजर दिखाई देता है
दुश्मनों की बात क्या
करें नादान
दोस्तों के हाथ में
भी खंजर दिखाई देता है

शनिवार, जुलाई 17, 2010

मंगलवार, जुलाई 13, 2010


रोता हूँ रोज सवेरे जब अख़बार देखता हूँ
पहले ही पन्ने पर हत्या बलात्कार देखता हूँ ............

फिर कातिल को सजा न दे पाई अदालत
गवाहों को मुकरते बार बार देखता हूँ ...................

ढूंढता रहा सारे दिन ख़बरों को
पर ख़बरों से ज्यादा प्रचार देखता हूँ ..............

दोष तुम्हारा नहीं खबरनवीशों
मैं भी अख़बार के साथ उपहार देखता हूँ ........

खाली पड़े है मंदिर मस्जिद के रास्ते
मैखानो में लम्बी कतार देखता हूँ ..................

बेमानी से लगते है खून के रिश्ते
जब एक घर चूल्हे चार देखता हूँ................

शनिवार, जुलाई 10, 2010



गुजरे ज़माने की सुंदर तस्वीर

मंगलवार, जून 22, 2010

तो कोई बात hai


रोते को हँसाओ तो कोई बात है
भेदभाव मिटाओ तो कोई बात है
अपनों को तो अपना बना लेते है सब
गैरों को अपना बनाओ तो कोई बात है


यह चश्मे वाले साहेब हैं जनाब मानस जी उनके ठीक बांये है शिखर मुकेश और उनके बांये है शालिनी मुकेश तीनो ही अपनी शरारतों के लिए घर को अखाडा बना सकने की ताक़त रखते है इसलिए मई इन्हें कहता हूँ ........न्यू थ्री इदिओत्स.............कहो कैसी रही

बेवजह

मोदी बनाम नितीश

जनता के पांच करोड़ की रकम पर दोनों ही ताल ठोक रहे है जो की लोकतंत्र के लिए नुक्सान दायक है और किसी भी तरह से गरीब जनता के हित में नहीं है सभ्य नेताओ से अनुरोध है की जनता की टैक्स की कमी को अपनी समझे और आप खुद भी जनता के सेवक है की मालिक इस लिए इस मुद्दे को ख़त्म कर दे बेहतर होगा.

शनिवार, मई 22, 2010


२१.०५.२०१० को फिल्म्स प्रभाग,लखनऊ में श्री एन वैद्यनाथन को ट्रान्सफर हो जाने के कारण एक शानदार पार्टी दी गयी, इस मौके पर फोटो सेसन भी हुआ .

गुरुवार, मई 20, 2010


लाश से खीच लूँ कफ़न साथियों
देश से बड़ा है धन साथियों
मंत्री बनकर सब बेच जाऊंगा
फिर तुम्हारे हवाले वतन साथियों

नादान

शहर की बड़ी पार्टियों में दिखते है
चाँद रुपयों के खातिर बिकते है
कलम भी शर्मिंदा है उनसे
जो कातिल को बेगुनाह लिखते है
नादान

अपनों के अरमानो को
यूँ कुचल दिया
चुपचाप उसने मोबाइल
का नंबर बदल दिया


nadan

सोमवार, अप्रैल 05, 2010

बेबसी


टूट ते बिखरते परिवार नज़र आते है
खाक में मिलते संस्कार नज़र आते है

भगवान भी रोता है यह देखकर
मंदिरों से ज्यादा बार नज़र आते है ............

जिन हाथो ने उसे बनाया था काबिल
बुढ़ापे में वोह बेबस लाचार नज़र आते है ...........

मैयत से ज्यादा वसीयत की फ़िक्र में
करीब मेरे रिश्तेदार नज़र आते है ............

सब बना रहे अलग आशियाना
वजूद मिट जाने के आसार नज़र आते है ................

जिसने बनाई हैसियत तुम्हारी
बुढ़ापे में क्यों बेकार नज़र आते है ...........

क्यों न रोये सवेरे 'नादान' मेरी आँखे
खून से लथपथ अखबार नज़र आते है .........







शनिवार, अप्रैल 03, 2010


जिनको न मिली मोहब्बत
वो पाने में बर्बाद हुए
जिनको मिल गयी
वो निभाने में बर्बाद हुए

रविवार, मार्च 28, 2010

औकात में रहिये


बान्द्रा वरली सी लिंक के दुसरे चरण के उदघाटन समारोह के बाद देश में नेताओ के बेसुरे राग सुनायी पड़े सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को आमंत्रित करने और अमिताभ द्वारा तहे दिल से कार्यक्रम का हिस्सा बनकर शायद ही ऐसी ओछी राजनीती की कल्पना की होगी जैसी की उन्हें सुननी पड़ी ।
कांग्रेस में शायद ही कोई ऐसा नेता हो जिसकी छवि अमिताभ बच्चन के इर्द गिर्द कही ठहरती हो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने जो कुछ पाया वोह अपनी महनत से नहीं वरन पिता के नाम के बदले जो पहले मुख्यमंत्री रह चुके है । पार्टी आलाकमान भी विरासत में मिली सत्ता भोग रही है । इसके विपरीत अमिताभ बच्चन ने जो पाया वोह अपनी महनत से ही पाया । सदी के महानायक का सम्मान भी उनकी अपनी महनत और शालीनता से भरे व्यवहार की वजह से ही मिला न की राजनेताओ की तरह झूठे वादों से यह अमिताभ बच्चन की अपनी जमा पूँजी है जो उन्होंने अपनी महनत से बनाई ।
दुसरे की दया और नाम से सत्ता सुख भोगने वालों आपको अमिताभ का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उस महान व्यक्तित्व ने तुम्हारे निमंत्रण को स्वीकार कर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए , महाराष्ट्र सरकार से पूछना चाहता हूँ कि क्या यह कार्यक्रम उनका पारिवारिक कार्यक्रम था या कांग्रेस पार्टी का निजी कार्यक्रम था जवाब होगा नहीं तो फिर सार्वजनिक प्रोग्राम के लिए इतनी जलालत क्यों ? अमिताभ बच्चन ने आपका निमंत्रण स्वीकार करके कार्यक्रम में शामिल होकर अपना नहीं तुम्हारा ही सम्मान बढाया है, कही यह अभिषेक की शादी में निमंत्रण न पाने की खीझ तो नहीं , यह शादी अमिताभ की पारिवारिक शादी थी सार्वजनिक नहीं की हर ऐरे गैरे को पूछा जाए । अमिताभ बच्चन का विरोध करने वालो, कुर्सी के भूखों अमिताभ सी इज्ज़त पाने में तुम्हे न जाने कितने जन्म लेने पढेंगे शायद फिर भी अमिताभ न बन पाओ इसलिए अपनी हैसियत को पहचानिए और जो इस देश की परंपरा है उसका निर्वहन करे यानी अतिथि देवो भवो ।

जय हिंद जय भारत

सोमवार, मार्च 22, 2010



बचपन हर ग़म से बेगाना होता है

रविवार, मार्च 21, 2010

टूटती उम्मीदें

उनको ही नज़र अंदाज़ किया जा रहा है
जिनकी पेंसन से राज किया जा रहा है

दौलत से उनकी ज़माने को दावत
मोटा उनको अनाज दिया जा रहा है ..............जिनकी पेंसन

कुत्ते को देखने घर आते डॉक्टर
सिविल में उनका इलाज़ किया जा रहा है .........जिनकी पेंसन


लय और ताल बचे नहीं जिनमे
बहलाने को दिल वो साज दिया जा रहा है ............जिनकी पेंसन

भूख से तड़प कर गयी जान जिनकी
भंडारा उनकी बरसी पर आज किया जा रहा है .....जिनकी पेंसन








बुधवार, मार्च 17, 2010

खामोश .काम करने दीजिये




जब से चश्मा लगाने लगे हैं
व्यस्त ज्यादा ही आने लगे हैं
नैना अब महफूज हो गए हैं
साइकिल भी तेज चलाने लगे हैं
सुनकर पहले मुस्कराए जनाब
बाद में हम पर गुस्साने लगे हैं
कहते हैं लिखकर दे दूंगा यह
सब ही हमको सताने लगे हैं
काम बड़े कर रहे बचपन से
"नादान" अब खुद को बताने लगे हैं


दिनाक १७.०३.२०१०
जनाब जहीर जी पुराने साथी के साथ यादव जी, रस्तोगी जी, वैदयानाथान जी, प्रवीण जी , उदय राज जी, कौशल जी और उमेश प्रसाद जी इस चित्र को संजोया मुकेश "नादान" ने

गुरुवार, मार्च 11, 2010

जज्बात


गुनाह कुछ ऐसा किया है मैंने
दोस्त नाम दुश्मन को दिया है मैंने


खुद और खुदा की पहचान सिर्फ
जिंदगी को अकेले ही जिया है मैंने .........दोस्त

मेरे ग़मों से तू हैरान न हो
खुशियों को खुद छोड़ दिया है मैंने ........दोस्त

तेरी दवा भी बेअसर हो गयी
जहर कुछ ज्यादा ही पिया है मैंने ........दोस्त

मिल गयी लाखो खुशियाँ मुझे
नाम खुदा का एक बार लिया है मैंने .........दोस्त

वो भूलकर खुश रहने लगे
याद उनको भी नहीं किया है मैंने ............दोस्त

मिल न जाये सजा गलतियों की
खुद को नादान लिख लिया है मैंने .........दोस्त

देश को आगे ले जाने के लिए देश के हर व्यक्ति को चाहे वोह भी किसी रुतबे पर क्यों हो इन शब्दों का पालन करना चाहिए.........आप से नादान की यही गुज़ारिश है ......जय हिंद.....जय भारत




मुकेश और शीतल ६ फ़रवरी २०१० को शाहजहाँ को याद करने पहुंचे मौका था शाहजहाँ के पहले निकाह के ४०० साल पूरा होना का १६१० में सफवी वंश की राजकुमारी जोकि मिर्ज़ा मुज़फ्फर हुसैन सफवी की पुत्री थी के साथ शाहजहाँ का पहला निकाह हुआ था ।

लाइक अहमद पेज संख्या १३४


कुछ जुदा जुदा मेरे हुज़ूर नज़र आते है
क्या बात है चश्मे बद्दूर नज़र आते है

शुक्रवार, मार्च 05, 2010

महिला दिवस


जैसाकि ज्ञात है की हर वर्ष ८ मार्च को हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर कागजो में महिलाओं के विषय में बड़े बड़े वादे कर के तीनो लोको का जो सुख प्राप्त करते है वो शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है फिर भी मेरे कवि मन ने कुछ शब्दों के माध्यम से अपनी आवाज़ को बहार निकलने की कोशिश की है आसा है की मेरी गलतियों को इंगित कर मुझको कुछ सीखने का मौका देंगे
धन्यवाद्



महिला दिवस

शान माँ बहन की
और बढ़ाना चाहिए
बहु और बेटी में
फर्क मिटाना चाहिए

साल में एक दिन
मुझे कम लगता है
महिला दिवस हर घर में
रोज मानना चाहिए ..........................

झुक कर करे सलाम
जमाना उसको
बेटी को काबिल इतना बनाना चाहिए ..................महिला ...................

जन्म से पहले ही
उसे मौत दे देना
तुम्हारी इस आदत में बदलाव आना चाहिए ............महिला....................

बहु भी नज़र आये
बेटी अपनी
हर सास को
चस्मा ऐसा लगाना चाहिए ................महिला.......................

मुकेश " नादान "


पुलिस गाथा


पुलिस वालों तुम महान हो
कितने कष्ट उठाते हो
जादूगर भी हो तुम
रस्सी को सांप बनाते हो
चोर लुटेरे और हत्यारे
आ जाए गर शरण तुम्हारे
बाल न बांका होता उनका
इंटरपोल भी छाप मारे
उसके बदले किसी और को
उम्र क़ैद कटवाते हो ............जादूगर भी हो तुम

महिमा आपकी बड़ी निराली
हाथ में डंडा मुह में गाली
ले दे मामला शांत करते
वर्ना ले जाते कोतवाली
निर्दोषों पर भी तुम
थर्ड डिग्री अपनाते हो ...........जादूगर भी हो तुम ...........

सोमवार, मार्च 01, 2010


तीर नज़रों से चलाये जा रहे है
क्या बात है जो मुस्कराएँ जा रहे है

नादान

शहर के महान लोगो के साथ लाल कोट में नादान ..................................................नादान

श्री मोहन लाल जी
श्री बीर बहादुर जी
श्री पूरन जी
श्री उमेश प्रसाद जी
श्री प्रेम सिंह नेगी जी
श्री रामधीर जी
सभी फिल्म्स प्रभाग भारत सरकार के रत्न है ।

शत शत नमन महान नानाजी देशमुख को


२७ फरवरी २०१० को ज्ञात हुआ कि वर्तमान गन्दी राजनीति में एक ऐसा भी व्यक्ति था जिसे वास्तविक रूप में जनता का सेवक कहा जा सके , ९३ वर्ष की आयु में नानाजी देशमुख का देहांत २६ फ़रवरी २०१० को होने के पश्चात् समाचार पत्रों के माध्यम से इस महान सेवक के कभी न भुला पाने वाले सुकर्मो की जानकारी हुई , इस महान नेता ने ६० वर्ष की उम्र पूरी होने पर राजनीति से सन्यास लेकर जनता की सेवा करने का जो संकल्प लिया वो आधुनिक राजनीति के लिए एक सीख होनी चाहिए लेकिन कोई दूसरा नेता नानाजी नहीं बनते दिखा, जीवन को उच्च आदर्शो से जीने वाले नाना ने अपना पार्थिव शरीर एम्स दिल्ली को समर्पित कर सच्चे रूप में अमरत्व प्राप्त कर लिया। महाराष्ट्र में जन्मे नानाजी ने उत्तर भारत में दीनदयाल अनुसन्धान खोल कर इसी को अपनी कर्मभूमि बना लिया। बाल ठाकरे और राज ठाकरे जैसे संकुचित मानसिकता के लोगो को और सत्ता के लिए लालायित नाम मात्र के जनता के सेवको को नानाजी से सीख लेनी चाहिए, धन्य है नानाजी आप, नादान आपको शत शत नमन करता है।

रंगों का मज़हब


सभी रंगों ने आपस में मिल कर,
मिटा दिया है अपना अस्तित्व।
भुला दिया है अपना धर्म,
नही रहा भेद भाव का तत्त्व।

नहीं रह गयी इनकी पहचान,
इनसे कुछ सीखेगा इन्सान ?

रविवार, फ़रवरी 28, 2010

तस्वीर का राज


तेरी तस्वीर को लगा के रखता हूँ सीने से
क्योंकि कलेजा हो गया छलनी सुबह शाम पीने से


कैसी होली

न वो गले मिलना न वो प्यार दिखाई देता है
शहर में है दोस्त पर मोबाइल पर बधाई देता है
छीन लिया है बचपन कॉपी और किताबों ने
बच्चों के मुह से हैप्पी होली सुनायी देता है............

कानून किसके लिए


रोज ऑफिस जाते समय देखता हूँ और सोचता हूँ कि भगवान ने अपनी तरफ से किसी से भेदभाव नहीं किया लेकिन उसके बन्दों ने बिना भेदभाव के कोई काम नहीं किया, हर तरफ पॉवर और पैसे का खेल चल रहा है, दरोगा जी अकेले जाते लड़के को रोकते है हेलमेट लगाये रहने के बावजूद कागज की मांग जो थे उनसे काम नहीं चला जो नहीं थे उसकी मांग की गयी अंत में सौदा ले दे वाली प्रक्रिया से गुजरता हुआ लड़का मुक्त होकर विजयी महसूस करता है उधर दरोगा जी शायद कुछ इतना पा गए थे जो वर्दी पर दाग लगाने के लिए काफी था । ठीक उसी समय एक गाडी पर तीन पुलिस के जवान आते है दरोगा जी के पास गाड़ी रोकते है , हाथ मिलाकर तीनो आगे बढ़ जाते है, पर दरोगा को साथियों की गैर कानूनी हरकत दिखाई नहीं देती, सच है देश में सभी कानूनों का पालन करने और मानने का जिम्मा आम आदमी पर ही है, ख़ास भले ही वोह किसी अधिकारी का चपरासी हो लेकिन अपने खास की श्रेणी में रखकर देश के किसी भी कानून को जब चाहे तब तोड़ने के पूर्ण रूप से स्वतंत्र है ।

जय हिंद

किस्मत

हम जमी तुम आसमान हो गए
एक दूजे से कितने अनजान हो गए
बी ऐ करके हम सरकारी बाबु बने
तुम अनपढ़,मंत्री बन महान हो गए ........

उम्र गुज़र गयी मेरी किरायेदारी में
कैसे तुम्हारे अपने मकान हो गए

जिस गाँव की मिटटी ने पाला है तुमको
क्यों शहर आकर उससे अनजान हो गए ..........
क्यों न डरे भूत अब इंसानों से
शहर के बीच अब शमशान हो गए...............

लगता है क़यामत आने वाली है
पुजारी की गिरफ्त भगवान हो गए..........

अब इंसानों की हिफाज़त हो कैसे
खुद मंदिर से चोरी भगवान हो गए............

नादान बेगुनाह साबित न हो सका
गवाह दौलत के आगे बेजुबान हो गए.........................


धोखा खा गए न .........जितना शरीफ दिख रहा है उतना है नहीं .....................


अच्छा है ध्यान से देखने दो .......भाई


हम साथ साथ है ..................................................


नन्हे मुन्ने राही है
दोनों बहिन भाई है


उपर वाले का हम पर अहसान हो गया
छोटा ही सही अपना मकान हो गया


ध्यान से देखो आगे बढ़ो कुछ ऐसा ही सोच रहे है .........मिस्टर राकेश .........नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इमुनोलोजी नईदिल्ली वाले.