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शुक्रवार, नवंबर 17, 2017

Sone nahi diya

तुम कौन हो मेरे  इस सवाल ने सोने नहीं दिया 
कल रात तेरे ख्याल ने हमें  सोने नहीं दिया 

दिमाग बोला क्या जरुरत है उसे याद करने की 
दिल बोला मेरी चाहत है उसी पर मरने की 
दोनों के इस बवाल ने सोने नहीं दिया------------

हम सब छोड़ आये सिर्फ तुम्हारे लिए 
तुमसे कुछ भी नहीं छोड़ा गया हमारे लिए 
कमी क्या थी हममे इस मलाल ने सोने नहीं दिया -------

pata to hai


vasiyat


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All is Well

नेता को वोट मिल जाए 
अफसर को नोट मिल जाए 
ग़ज़ब गठबंधन दोनों का 
तो सिस्टम में कैसे खोट मिल जाए 

                                                     नादान 
दिनाँक 7 अक्टूबर 2017 की कुछ तस्वीरें जिसमे प्रो० रीता बहुगुणा जोशी जी, कैबिनेट मंत्री और मा० स्वाति सिंह जी, मंत्री द्वय उत्तर प्रदेश शासन ने वाल्मीकि आश्रम भगवंत नगर, लखनऊ  में मेधावियों को सम्मानित किया, पचास मेधावियों के पुरस्कार की व्यवस्था की पंडित भवानी दत्त भट्ट जी ने. 










लाइलाज

एक मरीज  पुराना डॉक्टर बदलकर नए डॉक्टर के पास गया , मरीज कुछ समझ पाता उससे पहले डॉक्टर ने खूब बड़ी बड़ी बाते की कि तुम्हारी बीमारी को जड़ से मिटा दूंगा बस एक बार मुझे मौका दीजिये, मरीज विश्वास में आ गया उसे लगने लगा की उसके दुखो का अंत होने वाला है, और वो डॉक्टर साहेब से इलाज़ करवाने लगा , जब डॉक्टर साहेब को ये पक्का हो गया की अब ये मरीज पहले वाले डॉक्टर साहेब से सम्बन्ध तोड़ चूका है तो डॉक्टर साहेब ने इलाज़ शुरू किया और कुछ दिन बाद ही वो पुराने वाले डॉक्टर साहेब की कमिया गिनाने लगे मरीज बोलै साहेब उनसे हार कर ही तो मै आपके पास आया था वो भी पिछले वाले डॉक्टर की बुराई और कमी निकालते थे अब आप भी इलाज़ के नाम पर कमी निकाल रहे है , तो आपने पहले क्यों बड़ी बड़ी बाते की थी, डॉक्टर बोलै अगर इलाज़ होता तो तुम डॉक्टर क्यों बदलते और मेरे पास इलाज़ होता तो मैं  बड़ी बड़ी बाते क्यों करता इलाज़ नहीं है इसीलिए तो बड़ी बड़ी बाते करके हम सब डॉक्टर अपनी दूकान चला रहे है और तुम मरीज लोग इस बात को समझते ही नहीं हो, अगर हम ये बता दे की इलाज़ नहीं है तो कौन आएगा हमारे पास, क्या कभी सुना है की कोई डॉक्टर दूसरे डॉक्टर की शिकायत करने कही गया है जबकि उसे पता होता है की इलाज़ गलत हुआ था, हो रहा है और होता रहेगा , तुम यहाँ से निकलोगे  कही और जाओगे मिलेगा तुम्हे डॉक्टर ही ,  सबके नाम अलग है पर काम सब का एक ही है उल्लू बनाओ, दूकान चलाओ। 

उपरोक्त कहानी के पात्र :=  डॉक्टर------ सत्ताधारी नेता , और मरीज -----जनता