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रविवार, फ़रवरी 14, 2010

चंद रूपये जब से कमाने लगे है
बेअदबी से पेश आने लगे है
सीखा है जिससे उंगुली पकड़ के चलना
उनको ही रास्ता दिखाने लगे है
घरवाले पाते है मुश्किल से दाल रोटी
वो होटल में बिरयानी खाने लगे है
हाई स्कूल मुश्किल से पास करके
जनाब डिग्री कॉलेज चलाने लगे है
लगता है फिर चुनाव आने वाले है
तभी नेताजी नज़र आने लगे है
सीने से लगा रखा है लैपटॉप उसने
माँ बाप उसको पुराने लगे है
उम्र जिसकी गुजरी है जेल में
अब वोह जेल मंत्री कहलाने लगे है
बेकार आदमी कार पर चलता है
बैंक वाले क्या गुल खिलने लगे है
दवा के दामो से कोई नहीं डरता
डाक्टर की फीस से घबराने लगे है
हमने बनाया काबिल जिन्हें अपने लहू से
नादान वोह हमको बताने लगे है

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